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आरती – पंचपरमेष्ठी


यह विधि मंगल आरती कीजै,

पंच परम पद भज सुख लीजै।

प्रथम आरती श्री जिनराजा,

भवदधि पार उतार जिहाजा ॥ यह विधि ॥

दूजी आरती सिद्धन केरी,

सुमरत करत मिटे भव फेरी ॥ यह विधि ॥

तीजी आरती सूर मुनिंदा,

जनम-मरण दुःख दूर करिंदा ॥ यह विधि ॥

चौथी आरती श्री उवझाया,

दर्शन करत पाप पलाया ॥ यह विधि ॥

पाँचवीं आरती साधु तुम्हारी,

कुमति विनाशन शिव अधिकारी ॥ यह विधि ॥

छठी ग्यारह प्रतिमा धारी,

श्रावक बंदू आनंद कारी ॥ यह विधि ॥

सातवीं आरती श्री जिनवाणी,

धानत स्वर्ण मुक्ति सुखदानी ॥ यह विधि ॥

संजा करके आरती कीजे,

अपनो जनम सफल कर लीजे ॥ यह विधि ॥

सोने का दीपक, रत्नों की बाती,

आरती करूँ मैं, सारी-सारी राती ॥ यह विधि ॥

जो कोई आरती करे करावे

सो नर-नारी अमर पद पावे ॥ यह विधि ॥

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Updated: December 20, 2015 — 12:05 pm

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